Showing posts with label चन्द्र शेखर आज़ाद. Show all posts
Showing posts with label चन्द्र शेखर आज़ाद. Show all posts

Thursday, September 16, 2010

चन्द्र शेखर आज़ाद को समर्पित एक कविता

देश को आज़ाद कराने,
की ज़िद जिसने ठानी थी
उठा कर बन्दूक चलाकर कर गोली,
लिखनी नयी कहानी थी
भगत बिस्मिल के साथ,
ना जाने कितनी खाक छानी थी
कभी इस शहर कभी उस गाँव में,
जीवन जीना जिसकी निशानी थी
मार खाते हुए नाम आज़ाद
बताना उनकी साहस बयानी थी
पहन कर साधू का चोला
चकमा देना पुलिस को भी हैरानी थी
बाग में जब खुद को घिरा पाया
तो आखिरी गोली खुद पर चलानी थी
आज़ाद हुआ जीवन से आज़ाद जब
पूरे देश में ये चर्चा जुबानी थी